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दोस्ती और दुश्मनी: नीलवन के जंगल की एक दिलचस्प कहानी

पढ़िए "दोस्ती और दुश्मनी" की एक नई और ताज़ा कहानी। जानिए कैसे नीलवन के जंगल में एक ज़िद्दी सियार और एक नन्हे तोते की दुश्मनी, दोस्ती में बदल गई। बच्चों के लिए बेहतरीन सीख।

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क्यों ज़रूरी है दोस्ती और दुश्मनी को समझना?

बच्चों के जीवन में दोस्ती का एक बहुत बड़ा स्थान होता है। लेकिन अक्सर हम बिना सोचे-समझे किसी को अपना दुश्मन मान लेते हैं। नीलवन के जंगल की यह कहानी हमें सिखाती है कि दोस्ती और दुश्मनी अक्सर हमारे नज़रिए पर निर्भर करती है। इस कहानी में हम देखेंगे कि कैसे एक मुसीबत ने दो बिल्कुल अलग स्वभाव वाले जानवरों को एक कर दिया। इस तरह की जंगल (Forest) की कहानियाँ हमें प्रकृति और रिश्तों के बारे में बहुत कुछ सिखाती हैं।

नीलवन का वो रहस्यमयी कोना

बहुत समय पहले की बात है, एक जंगल था जिसका नाम था 'नीलवन'। इस जंगल की खास बात यह थी कि यहाँ के पेड़ों की पत्तियाँ हल्की नीली चमक लिए हुए थीं। इस जंगल के एक पुराने और घने कोने में एक सियार रहता था, जिसका नाम था राणा। राणा का रंग सुनहरा था और उसकी एक खास पहचान थी—वह हमेशा अपने गले में एक बड़ा सा 'हरा पत्ता' लपेटे रहता था, जैसे कोई स्कार्फ हो।

राणा थोड़ा अकड़ू और गुस्से वाला था। उसे लगता था कि पूरे जंगल में सब उसके दुश्मन हैं। वह किसी से बात नहीं करता था और अगर कोई उसके इलाके में आता, तो वह ज़ोर से गुर्राता था। उसका मानना था कि "इस दुनिया में या तो तुम शिकारी हो, या शिकार।"

उसी जंगल के दूसरे छोर पर एक नन्हा तोता रहता था, जिसका नाम था टीटू। टीटू के पंख चमकदार नीले थे और उसकी आँखें बहुत ही शरारती थीं। टीटू बहुत बोलता था और हर किसी से दोस्ती करना चाहता था। टीटू को राणा की 'अकड़ू' छवि के बारे में पता था, फिर भी उसने ठान लिया था कि वह राणा से दोस्ती करके रहेगा।

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एक अनोखी तकरार

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एक दोपहर, जब सूरज की किरणें नीली पत्तियों से छन कर ज़मीन पर आ रही थीं, टीटू उड़ते हुए राणा की गुफा के पास पहुँचा। राणा वहाँ एक पुरानी चट्टान पर लेटा धूप सेंक रहा था। टीटू एक गहरी साँस लेकर राणा के बिल्कुल पास वाली टहनी पर बैठ गया।

"नमस्ते राणा भाई! आज का मौसम कितना सुहाना है ना?" टीटू ने अपनी मीठी आवाज़ में कहा।

राणा ने एक आँख खोली और गुस्से में गुर्राया, "ऐ नीले परिंदे! मैंने तुझे कितनी बार कहा है कि मेरे इलाके में मत आया कर। तू मेरा दोस्त नहीं है, और अगर यहाँ से तुरंत नहीं उड़ा, तो तू मेरा दोपहर का नाश्ता बन जाएगा।"

टीटू डरने के बजाय थोड़ा और करीब आ गया। "अरे राणा भाई, दुश्मनी में क्या रखा है? देखो, मेरे पास तुम्हारे लिए कुछ है।" टीटू ने अपनी चोंच से एक रसीला अमरूद राणा के सामने गिरा दिया।

राणा ने उस अमरूद को लात मारकर दूर फेंक दिया। "मुझे तेरा एहसान नहीं चाहिए। दोस्ती कमज़ोरों का काम है। मैं अकेला ही काफी हूँ।"

टीटू उदास तो हुआ, पर उसने हिम्मत नहीं हारी। अगले कई दिनों तक टीटू राणा के पास जाता रहा। कभी वह उसे नई जगह के बारे में बताता, तो कभी बस चुपचाप उसे देखता रहता। पर राणा का गुस्सा कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था।

जब कुदरत ने करवट बदली

एक शाम, नीलवन का मौसम अचानक बदल गया। काले बादल छा गए और बिजली कड़कने लगी। जंगल के जानवर अपने-अपने घरों की तरफ भागने लगे। लेकिन यह कोई आम तूफान नहीं था। बारिश इतनी तेज़ थी कि नीली पत्तियाँ भी कांपने लगी थीं।

राणा अपनी गुफा की तरफ भाग रहा था, तभी अचानक एक ज़ोर की बिजली गिरी। राणा के पास वाला एक बहुत बड़ा और भारी पेड़ जड़ से उखड़ कर उसके ऊपर गिर गया। राणा की किस्मत अच्छी थी कि पेड़ का तना उसके पेट पर नहीं गिरा, लेकिन उसका पिछला पैर पेड़ की भारी टहनियों के नीचे दब गया।

"बचाओ! कोई है? मेरी मदद करो!" राणा ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगा। लेकिन बारिश की गरज में उसकी आवाज़ दब रही थी। वह जितना निकलने की कोशिश करता, उतना ही दर्द से तड़प उठता। उसने महसूस किया कि जिसे वह अपनी दुश्मनी और अकेलापन समझता था, वही आज उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी बन गई थी। कोई नहीं था जो उसके दुख को सुन सके।

दोस्ती का इम्तिहान

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टीटू अपने घोंसले में दुबका हुआ था, लेकिन उसे कुछ अजीब लगा। उसने राणा की दबी हुई आवाज़ सुन ली थी। बिना अपनी जान की परवाह किए, टीटू उस तूफान में निकल पड़ा। उसने देखा कि राणा बुरी तरह फंसा हुआ है और पानी का स्तर तेज़ी से बढ़ रहा है।

"राणा भाई! घबराओ मत, मैं आ गया हूँ," टीटू ने चिल्लाते हुए कहा।

राणा ने ऊपर देखा। उसकी आँखों में पहली बार दुश्मनी की जगह डर और उम्मीद थी। "टीटू? तुम यहाँ क्यों आए? यह बहुत खतरनाक है। तुम जाओ यहाँ से।"

"नहीं राणा भाई, दोस्ती सिर्फ अच्छे वक्त के लिए नहीं होती," टीटू ने कहा। टीटू छोटा था, वह पेड़ नहीं हटा सकता था। लेकिन उसने अपना दिमाग लगाया। वह तुरंत उड़ कर पास के हाथी-परिवार के पास गया, जिनसे वह रोज़ बातें करता था।

टीटू ने हाथी के राजा, 'गज्जू', से विनती की। गज्जू और उसके साथी तुरंत राणा की तरफ दौड़े। कुछ ही देर में, हाथियों ने अपनी सूंड से उस भारी पेड़ को हटा दिया। राणा आज़ाद था, पर उसका पैर ज़ख्मी हो गया था।

दुश्मनी से दोस्ती तक का सफर

बारिश थमी और नीलवन में एक नई सुबह हुई। राणा अपनी गुफा के बाहर लेटा था, और टीटू उसके ज़ख्मी पैर पर कुछ जड़ी-बूटियाँ लगा रहा था जो उसने जंगल से इकट्ठा की थीं।

राणा ने बहुत देर तक कुछ नहीं कहा। फिर धीरे से बोला, "टीटू, मुझे माफ कर दो। मैंने तुम्हें हमेशा दुश्मन समझा, तुम्हारा मज़ाक उड़ाया। लेकिन जब मुझे सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी, तब सिर्फ तुम ही मेरे पास आए। मैंने हमेशा सोचा कि अकेला रहना ही ताकत है, पर आज समझ आया कि असली ताकत दोस्ती में है।"

टीटू मुस्कुराया और बोला, "दोस्ती कोई बोझ नहीं है राणा भाई, ये तो वो पंख हैं जो हमें मुश्किल वक्त में उड़ना सिखाते हैं।"

उस दिन के बाद, राणा और टीटू की दोस्ती पूरे नीलवन जंगल में मशहूर हो गई। वह सियार जो कभी किसी को पास नहीं आने देता था, अब टीटू को अपनी पीठ पर बिठा कर पूरे जंगल की सैर करवाता था। राणा ने अपने गले का हरा पत्ता टीटू को भेंट कर दिया, जो अब उनकी दोस्ती का प्रतीक बन गया था।

कहानी की सीख (Moral)

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि "सच्चा दोस्त वही होता है जो मुश्किल वक्त में काम आए।" दुश्मनी और घमंड सिर्फ नुकसान पहुँचाते हैं, जबकि दोस्ती और सहयोग से हम किसी भी बड़ी से बड़ी मुसीबत को हरा सकते हैं। हमें कभी भी किसी के छोटे होने या उसके अलग होने पर उसका मज़ाक नहीं उड़ाना चाहिए।

विकिपीडिया लिंक (Wikipedia Link)

वन्यजीवों के बारे में और जानने के लिए: Wildlife 

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